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भारत में समान सेक्टर के शेयरों की तुलना कैसे करें?

निवेश करने के लिए एकदम सटीक सेक्टर का आकलन करना है तो एक ही सेक्टर में शेयरों की तुलना करना सही तकनीक है। इसकी प्रक्रिया आसान है : कोई एक फाइनेंशियल रेश्यो यानी वित्तीय अनुपात (P/E, D/E, या RoE) चुनें। इससे आप अपनी पसंदीदा कंपनी का बैलेंस पा सकते हैं।

फिर आप उस निवेश सेक्टर की उन सभी कंपनियों की लिस्ट बना सकते हैं, जो एक ही क्षेत्र में काम करती हैं। इससे उस पीयर ग्रुप की हर कंपनी के रेश्यो को निर्धारित करने में मदद मिलेगी। यह जानना जरूरी है कि कंपनियां एक ही सेक्टर के शेयरों की तुलना कैसे करती हैं।

एक ही सेक्टर के शेयरों की तुलना करना क्यों जरूरी है?

अगर एक ही क्षेत्र की 2 कंपनियों की हम तुलना करना चाहें तो आसान है। मगर अलग-अलग उद्योगों का सीजन अलग होता है। ज़ाहिर है कि सीजन से हमारा मतलब मौसम से नहीं है। हर उद्योग में एक साल के अंदर कुछ समय ऐसा होता है, जिसमें वे आमतौर पर ज्यादा बिक्री करते हैं या ज्यादा आय कमाते हैं।

इन्हीं मौकों पर तैयार होने के लिए, कंपनियां पहले ज्यादा खर्च और निवेश करती हैं। यह एक उद्योग में एक साल के भीतर खर्च, उत्पादन, बिक्री और लाभ के पैटर्न में एकरूपता पैदा करता है। हालांकि, सभी उद्योग एक साथ नहीं चलते हैं। एक छाता कंपनी की बारिश के मौसम में ज्यादा बिक्री होगी, जबकि एक स्विमिंग ट्रंक कंपनी की गर्मियों में ज्यादा बिक्री होगी।

इस तरह अलग-अलग क्षेत्रों के मूल्यों में उतार-चढ़ाव होता रहता है और पूरे साल या बिजनेस साइकिल में एक-दूसरे से आगे निकलते जाते हैं।

एक ही क्षेत्र के शेयरों की तुलना करने की दूसरी वजह यह है कि क्षेत्रों का आकार भी अलग-अलग होता है। इसके कई कारण हैं, जैसे कि ज्यादा FDI की अनुमति देकर सरकार किसी सेक्टर को सपोर्ट करती है।

यह याद रखना जरूरी है कि विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियां अलग-अलग इकोसिस्टम (पारिस्थितिकी तंत्र) में मौजूद होती हैं। इस तरह उनके स्टॉक अलग-अलग तरह से चलते हैं।

स्टॉक की तुलना करने के लिए लीवरेज और प्रोफिटेबिलिटी का इस्तेमाल करना

दुनिया भर में कई पेशेवर इक्विटी एनालिस्ट इक्विटी विश्लेषण करने के लिए एक ही सेक्टर के शेयरों की तुलना करते हैं। इसके जरिए आसानी से देखा जा सकता है कि किस शेयर का मूल्य ज्यादा है और किसे अपने पोर्टफोलियों में शामिल करना चाहिए।

यह विश्लेषण करने के अलग-अलग तरीके हैं। उच्च गुणवत्ता वाले शेयरों में निवेश की पहचान करने और भारत के शेयर बाजार में निवेश के लिए सबसे बढ़िया सेक्टर का विश्लेषण करने के लिए, उसी उद्योग में अन्य फर्मों के साथ कंपनी की तुलना करना सबसे पसंदीदा तरीका है। आइए इस पर नजर डालते हैं।

अगर आप किसी कंपनी की उसके विरोधियों से तुलना करना चाहते हैं, तो ये दो प्रमुख वैरिएबल आपकी मदद कर सकते हैं।

आप जिस कंपनी में निवेश करना चाहते हैं उसमें 20% रिटर्न ऑन इक्विटी (RoE) है, जबकि निवेश सेक्टर का औसत 15% है। इससे यह पता चलता है कि कंपनी ने इक्विटी के पैसे को कमाई में बदलने की ज्यादा मेहनत की है।

किसी कंपनी की उसके विरोधियों से तुलना करने के लिए कई मैट्रिक्स हैं। इनमें रिटर्न ऑन इक्विटी (RoE), रिटर्न ऑन एसेट्स (ROA), मार्जिन (ग्रोस, ऑपरेशनल और प्रॉफिट) और D/E रेश्यो समेत अन्य चीजें शामिल हैं। आप इसी तरह की प्रक्रिया और इन नंबरों का इस्तेमाल करके तुलनात्मक विश्लेषण कर सकते हैं।

अपेक्षित वार्षिक आय वृद्धि (Expected Annual Earnings Growth) एक अहम कारक है। हालांकि इसकी गणना के कई तरीके हैं। हमारा मानना है कि निवेशक रिसर्च एनालिस्ट को तीन-चौथाई फॉलो करके निवेश के लिए बेस्ट सेक्टर का औसत मूल्य पता कर सकते हैं। इस चीज पर हमेशा ध्यान दें, क्योंकि इसके मूल्य को यह मुख्य तौर पर प्रभावित करता है। अच्छे आधार और उच्च अनुमानित वार्षिक आय वृद्धि दर वाली फर्म में निवेश करना सही रहता है।

समान सेक्टर में शेयरों की तुलना करने के 5 टिप्स

बतौर कंपनी समान सेक्टर में मौलिक मूल्यांकन करना स्टॉक विश्लेषण का एक अभिन्न अंग है। इससे आपको कंपनी की ताकत का मूल्यांकन करने और निवेश का सही फैसला लेने में मदद मिलती है।

हालांकि इसमें थोड़ा वक्त और मेहनत लगती है। यह ऐसे मजबूत शेयर को पहचानने की सबसे बढ़िया तकनीक है जो समय की कसौटी पर खरा उतर सके और बाजार में अस्थिरता के बावजूद लगातार रिटर्न दे सके।

1. मूल्य से आय अनुपात (Price-to-Earning Ratio)

समान सेक्टर में शेयर बाजारों की तुलना करने से पहले अनुपातों (रेश्यो) को समझना जरूरी है। P/E रेश्यो ज्यादा है तो इसका मतलब शेयर अपनी कमाई की तुलना में महंगा है। दूसरी ओर, P/E रेश्यो कम है तो कंपनी का मूल्यांकन कम है और इसे खरीदना सही रहेगा। हालांकि, आपको यह समझना चाहिए कि कम मूल्य वाली कंपनी में कुछ मूलभूत समस्याएं हो सकती हैं, जिसका असर कीमत पर पड़ सकता है

2. मूल्य-से-बिक्री अनुपात (Price-to-Sales Ratio)

जब P/S रेश्यो ज्यादा होता है, तो माना जाता है कि निवेशक प्रति यूनिट बिक्री (सेल्स) के लिए ज्यादा भुगतान करने को तैयार हैं। इसका मतलब यह भी है कि स्टॉक महंगा है। दूसरी ओर, कम P/S रेश्यो का मतलब है कि यह शेयर किफायती है और इसमें निवेश करने पर विचार किया जा सकता है।

3. डेट-से-इक्विटी अनुपात (Debt-to-Equity Ratio)

D/E रेश्यो ज्यादा है तो इसका मतलब है कि कंपनी के काम कर्ज की राशि पर निर्भर हैं। यह एक अहम अनुपात है क्योंकि इससे पता चलता है कि कंपनी की मजबूत विकास दर प्रभावी व्यावसायिक फैसलों से है या ये बड़े-बड़े वादों पर टिकी है। इससे आपको निवेश के लिए सबसे अच्छा सेक्टर जानने में अंदरूनी नजरिया मिलेगा। Debt से कंपनी को फाइनेंशियल लीवरेज मिलता है।

4. अन्य मैट्रिक्स

किसी कंपनी/निगम की तुलना करने के लिए कुछ और जरूरी मैट्रिक्स हैं। इनमें निवेश पर रिटर्न (RoI), एसेट्स पर रिटर्न (ROA), मार्जिन (ग्रोस, ऑपरेशनल और प्रॉफिट), D/E रेश्यो और अन्य शामिल हैं। अपेक्षित वार्षिक आय वृद्धि (Expected Annual Earnings Growth) एक और महत्वपूर्ण मीट्रिक है। अच्छा आधार और ज्यादा अनुमानित वार्षिक आय वृद्धि दर वाली फर्म में निवेश करना एक शानदार सौदा हो सकता है।

सेक्टर के औसत की तुलना में इक्विटी पर बेहतर रिटर्न देने वाली फर्म में निवेश करना सही रहता है। मुनाफे के नजरिए से इसे सही समझा जाता है। यह दर्शाता है कि कंपनी ने अपनी इक्विटी पूंजी को कमाई में बदलने के लिए ज्यादा मेहनत की है। हालांकि, किसी की तुलना करते वक्त सेक्टर के जरूरी रेश्यो पर भी जरूर विचार करना चाहिए।

5. बोनस टिप- पोर्टर के फाइव फोर्सेज

पोर्टर के फाइव फोर्सेज किसी कंपनी की प्रतिस्पर्धात्मकता (competitiveness) का आकलन कर सकते हैं। यह अहम है, क्योंकि कंपनी की अपने प्रतिस्पर्धियों या विरोधियों को मैनेज करने की क्षमता से ही उसे कामयाबी मिलती है। सबस्टिट्यूशन का खतरा, नए विरोधियों का जोखिम, सप्लायर से भाव-ताव करने की क्षमता, ग्राहकों की ताकत और सामान्य प्रतिस्पर्धी परिदृश्य जैसे अहम कारकों पर विचार करना चाहिए।

आखिर में

स्टॉक पर रिसर्च करते समय, फर्म पर गहराई से रिसर्च करना जरूरी होता है। जब तक आप किसी कंपनी के प्रतिस्पर्धियों (competitors) को नहीं आंकते, तब तक बड़ा लक्ष्य नहीं बना सकते हैं। सही शेयर चुनेंगे तभी पता चलेगा आपको घाटा होगा या अच्छा  मुनाफा मिलेगा।

वेल्थडेस्क रिटेल निवेशकों को सेबी से पंजीकृत पेशेवरों द्वारा बनाए गए पोर्टफोलियो में निवेश करने के लिए एक प्लेटफॉर्म मुहैया कराता है। अगर आप शेयरों में निवेश करना चाहते हैं, तो वेल्थडेस्क में अलग-अलग थीम या सेक्टर पर आधारित वेल्थबास्केट्स में से कोई एक चुनें और प्रीमियम पोर्टफोलियो में निवेश करें।

इसका मूल उद्देश्य उसी क्षेत्र में स्टॉक हासिल करना है जो बाजार में सबसे अग्रणी है। तुलना की बात करें तो एक कंपनी की ज्यादा से ज्यादा जानकारी हासिल करना जरूरी होता है। इससे उस कंपनी की ताकत आसानी से पता चल सकता है। फिर भी, किसी कंपनी की सही से तुलना करने के लिए विरोधियों और गुणात्मक पहलुओं को छोड़ना नहीं चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

मैं समान सेक्टर में सबसे अच्छा बढ़ता हुआ स्टॉक कैसे खोज सकता हूं?

बाजार में तेजी के दौरान उसे ऊपर की ओर ले जाने वाले सबसे बेहतरीन सेक्टर और उन क्षेत्रों के शीर्ष शेयरों की पहचान करें। फिर तय करें कि पूरे बाजार में कौनसे सबसे अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।

मैं किसी सेक्टर में सबसे अच्छा स्टॉक कैसे खोज सकता हूं?

तेजी से आगे बढ़ने वाले और उनमें मौजूद शीर्ष स्टॉक की पहचान करें। कोई सेक्टर या शेयर चुनने से पहले निवेशकों को ट्रेंड जानने के लिए चार्ट के भीतर अलग-अलग समयसीमा का इस्तेमाल करना चाहिए। फिर तय करें कि कौनसे उद्योग बाजार में सबसे अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। अंतिम फैसला लेने से पहले विभिन्न अनुपातों और मापदंडों के आधार पर उस सेक्टर का तुलनात्मक विश्लेषण करना चाहिए।

रिवर्स स्टॉक स्प्लिट क्या है?

रिवर्स स्टॉक स्प्लिट एक वित्तीय प्रक्रिया है, जिसमें किसी कंपनी के ज्यादा मूल्य वाले शेयर बनाने के लिए, उसके शेयरों को आनुपातिक रूप से मिला दिया जाता है। रिवर्स स्टॉक स्प्लिट को स्टॉक मर्ज भी कहते हैं।

कैसे अनुमान लगाते हैं कि कोई स्टॉक ऊपर जाएगा या गिरेगा?

जब किसी कंपनी की कीमत सामान्य से अधिक मात्रा के साथ बढ़ती है, तो यह संकेत देता है कि निवेशक रैली के साथ चल रहे हैं और स्टॉक में बढ़ोतरी जारी रहेगी। दूसरी ओर, अगर किसी स्टॉक का मूल्य बड़े पैमाने पर कम हो रहा है, तो यह गिरावट का संकेत है। अगर कोई बड़े पैमाने पर शेयर खरीदता या बेचता है, तो भी ट्रेंड बदल सकता है।

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