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भारत में ईटीएफ में निवेश की पूरी गाइड

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ईटीएफ क्या हैं?

एक्सचेंज ट्रेडेड फंड या ईटीएफ निवेश करने का एक इनोवेटिव तरीका है। 1993 में यह अमेरिका में लॉन्च हुआ और फिर दुनिया भर में लोकप्रिय हो गया। ईटीएफ म्यूचुअल फंड के मॉडल पर काम करते हैं, जिसमें निवेशक अपने फंड को पूल करते हैं। एक फंड मैनेजर इन फंडों को निवेशकों के लिए निवेश करता है। ईटीएफ में स्टॉक, बॉन्ड, मुद्रा और कमोडिटी जैसे अलग-अलग तरह के निवेश शामिल हो सकते हैं। इसमें विभिन्न उद्योगों के हजारों शेयर हो सकते हैं या फिर स्टॉक किसी विशेष क्षेत्र या उद्योग तक सीमित हो सकते हैं। हालांकि, म्यूचुअल फंड के विपरीत, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्टेड होते हैं और वहां ट्रेड करते हैं। अन्य शेयरों की तरह, ईटीएफ में खरीदार और विक्रेता होते हैं। इनमें मांग और आपूर्ति के आधार पर उनकी कीमत निर्धारित होती हैं।

भारत में ईटीएफ क्या हैं?

भारत में, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड पैसिव निवेश का सबसे आम तरीका बन गया है। क्योंकि भारत में म्यूचुअल फंड का खर्च अनुपात ईटीएफ की तुलना में ज्यादा है। यहां म्यूचुअल फंड का खर्च अनुपात 1.05 और 2.25% के बीच है, जबकि ईटीएफ का खर्च अनुपात 1% से कम है।

ईटीएफ फ्लेक्सिबिलिटी भी देते हैं। कुछ शेयरों में बेतरतीब ढंग से निवेश करने के बजाय, आप अधिक डायवर्सिफिकेशन (diversification) का विकल्प चुन सकते हैं। आप बाजार के खुले होने पर कभी भी ईटीएफ को उस समय की कीमत पर खरीद और बेच सकते हैं।

इंडेक्स फंड और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड के बीच प्रमुख अंतर क्या हैं?

इंडेक्स फंड बॉन्ड और स्टॉक के पोर्टफोलियो हैं जो खास तौर पर एक वित्तीय बाजार के सूचकांक की संरचना और प्रदर्शन की नकल करते हैं। यह एक्सचेंज ट्रेडेड फंड की तरह पैसिव निवेश (passive investment) की एक अच्छी रणनीति भी है। हालांकि, “इंडेक्स फंड और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड के बीच भ्रम पैदा होना आसान है, क्योंकि दोनों इंडेक्स को ट्रैक करते हैं और कम लागत पर पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन की सुविधा देते हैं।

एक्सचेंज ट्रेडेड फंड के प्रकार

सभी ईटीएफ एक जैसे नहीं होते हैं। निवेशकों के लिए कई प्रकार के ईटीएफ उपलब्ध हैं और हर एक प्रकार के ईटीएफ का उद्देश्य अलग होता है। कोई ईटीएफ कमाई बढ़ाने  के लिए सही हो सकता है, जबकि दूसरा ईटीएफ निवेशक के पोर्टफोलियो में जोखिम को आंशिक रूप कम करने या उसे सीमित करने में मदद कर सकता है।

ईटीएफ को मोटे तौर पर नीचे 5 प्रकारों में बांटा जा सकता है:

1. बॉन्ड ईटीएफ: अंतरराष्ट्रीय और घरेलू सरकारी बॉन्ड से लेकर कॉर्पोरेट बॉन्ड तक, निवेशकों के लिए कई बॉन्ड ईटीएफ उपलब्ध हैं। आमतौर पर, बॉन्ड लिक्विड नहीं होते हैं इन्हें मैच्योरिटी  तक रखा जाता है।  हालांकि, बॉन्ड ईटीएफ का बाजारों में सक्रिय रूप से कारोबार किया जा सकता है। ये उन निवेशकों के लिए बहुत अच्छे हैं जो बॉन्ड मार्केट में अपनी पहचान छोड़ना चाहते हैं। बॉन्ड ईटीएफ व्यापक या विशिष्ट हो सकते हैं। ब्रॉड-मार्केट ईटीएफ पूरे बाजार को कवर करते हैं, आप विशिष्ट प्रकार के बॉन्ड ईटीएफ भी पा सकते हैं जैसे कॉरपोरेट डेट (debt), ट्रेजरी बॉन्ड आदि।

2. कमोडिटी ईटीएफ: भारत में आपको ऐसे कमोडिटी ईटीएफ मिल सकते हैं, जो किसी खास क्षेत्र या पूरे बाजार को टारगेट करते हैं। कमोडिटी ईटीएफ आकर्षक होते हैं, क्योंकि वायदा या अन्य डेरिवेटिव उत्पादों को खरीदने की प्रक्रिया जानें बिना निवेशक कमोडिटीज तक पहुंच बना सकते हैं। ये ईटीएफ एक कमोडिटी को फिजिकल स्टोरेज में रखकर या वायदा कॉन्ट्रैक्ट में निवेश करके उस पर फोकस करते हैं। ये ईटीएफ उन निवेशकों के लिए बहुत अच्छे हैं जो अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाना चाहते हैं। हालांकि, जालसाजी से बचने के लिए निवेशक को वायदा बाजार के बारे में जानकारी होनी चाहिए।

3. मुद्रा ईटीएफ: भारत में मुद्रा ईटीएफ या करेंसी ईटीएफ कमोडिटी ईटीएफ एक जैसे होते हैं। कमोडिटी ईटीएफ के जरिए निवेशक किसी भौतिक वस्तु को खरीदे बिना उसके शेयर लेकर मुनाफा कमा सकते हैं। वहीं, मुद्रा ईटीएफ के जरिए वे अमेरिकी डॉलर के मूल्य के आधार पर विदेशी मुद्रा के मूल्यों में बदलाव से मुनाफा कमाते हैं। मुद्रा ईटीएफ में ऐसे शेयर होते हैं जो एक विदेशी मुद्रा की एक विशेष राशि का प्रतिनिधित्व करते हैं। विदेशी निवेश की चाहत रखने वाले निवेशकों के लिए ये ईटीएफ बहुत अच्छे हैं। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि मुद्रा में स्मार्ट रणनीति के साथ निवेश करना चाहिए क्योंकि आज के समय में मुद्राएं ज्यादा अस्थिर होती जा रही हैं।

4. सेक्टर ईटीएफ: नाम से ही पता चलता है कि सेक्टर ईटीएफ निवेशकों को बाजार में किसी विशेष क्षेत्र अथवा सेक्टर से स्टॉक खरीदने की अनुमति देता है। सभी उद्योगों में छोटे-छोटे हिस्सों में निवेश करने के बजाय, सेक्टर ईटीएफ निवेशकों को एक खास सेक्टर पर फोकस करने की सुविधा देता है। अगर आपने जो सेक्टर चुना है वो अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, तो सेक्टर ईटीएफ ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, कोविड-19 महामारी के दौरान, फार्मा उद्योग निवेशकों के लिए आकर्षक बन गया। हालांकि, यह एक ज्यादा जोखिम वाला निवेश है क्योंकि आप अपने सभी फंडों को एक ही सेक्टर में निवेश करते हैं।

5. गोल्ड ईटीएफ: अर्थव्यवस्था और मुद्रा में उतार-चढ़ाव से बचने के लिए गोल्ड में निवेश हमेशा एक शानदार तरीका रहा है। हालांकि, भौतिक सोने (फिजिकल गोल्ड) में निवेश करने पर आपको टैक्स, पुनर्विक्रय (रीसेल), गुणवत्ता जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। मगर गोल्ड ईटीएफ के जरिए आप फिजिकल गोल्ड की कीमत पर फोकस करते हुए गोल्ड को इलेक्ट्रॉनिक रूप में खरीद सकते हैं। यह कमोडिटी ईटीएफ की तरह सिंथेटिक ईटीएफ भी है। आप एक गोल्ड ईटीएफ के जरिए शुद्ध गुणवत्ता वाले 1 ग्राम फिजिकल गोल्ड में निवेश कर सकते हैं। अन्य शेयरों की तरह, गोल्ड ईटीएफ का कारोबार बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज लिमिटेड (बीएसई) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (एनएसई) पर होता है।

क्या हर एसेट वर्ग के लिए ईटीएफ उपलब्ध हैं?

इस सवाल का आसान सा जवाब है, हां। एक्सचेंज ट्रेडेड फंड पारंपरिक एसेट वर्गों जैसे नकद, स्टॉक और बॉन्ड से लेकर वैकल्पिक एसेट वर्गों जैसे मुद्राओं और वस्तुओं तक सभी संभावित एसेट वर्गों में उपलब्ध हैं। ऊपर दी गई लिस्ट में अलग-अलग प्रकार के ईटीएफ के बारे में जानकारी दी गई है।

अगर शेयर बाजार गिरेगा तो क्या सभी ईटीएफ की कीमतें गिरेंगी

ईटीएफ शेयर बाजार में लिस्टेड सभी एसेट वर्गों के लिए उपलब्ध है, इसलिए ऐसा कहा जा सकता है कि शेयर बाजार में मंदी के दौरान ईटीएफ की कीमतों में गिरावट आएगी। मगर, कीमतें उनके अंदर मौजूद एसेट्स के मूल्य के बराबर होने की संभावना रहती है।

बाजार में गिरावट आने पर कुछ निवेशक एक्सचेंज ट्रेडेड फंड में ज्यादा निवेश करना पसंद करते हैं। ऐसी स्थिति में निवेश की लागत अपेक्षाकृत कम हो जाती है और बाजार में सुधार के बाद रिटर्न में बढ़ोतरी होती है। हालांकि, इसके लिए निवेशक के पास शेयर बाजार की गहरी समझ और बड़ा जोखिम लेने की इच्छा शक्ति होनी चाहिए।

ईटीएफ निश्चित रूप से जोखिमों से भरा है। इसलिए आपको एक वित्तीय सलाहकार से परामर्श करने की जरूरत है, जो न केवल निवेश में विशेषज्ञ हो बल्कि ईटीएफ से जुड़े सभी जोखिमों को भी समझता हो।

वेल्थडेस्क में हम निवेशकों को उनका फंड इक्विटी के विशिष्ट वेल्थबास्केट में पूल करने की सुविधा देते हैं। हमारे विशेषज्ञ अच्छी तरह से संतुलित और डायवर्सिफाइड ईटीएफ पोर्टफोलियो बनाने के लिए शेयर बाजार का अध्ययन और रिसर्च करते हैं। इन पोर्टफोलियो को फिर वेल्थबास्केट्स में बदल दिया जाता है, जिन्हें आपके ब्रोकिंग अकाउंट से जोड़ा जा सकता है। एक बार जब आप वेल्थबास्केट्स चुनते हैं, तो सलाहकार आपके जोखिम और रिटर्न के आधार पर उन्हें अपडेट करते रहते हैं।

क्या ईटीएफ एक्टिव हो सकते हैं?

जैसे-जैसे एक्सचेंज ट्रेडेड फंड बाजार विकसित हुआ है, उससे विभिन्न ईटीएफ उभर कर आए हैं। एक्विटवली मैनेज्ड (सक्रिय रूप से प्रबंधित) ईटीएफ दो प्रकार के होते हैं: पारंपरिक एक्टिवली मैनेज्ड ईटीएफ और अर्ध-पारदर्शी एक्टिव ईटीएफ।

एक्टिव मैनेजमेंट के पीछे मुख्य अवधारणा यह है कि पोर्टफोलियो मैनेजर किसी इंडेक्स को ट्रैक करने के नियमों का पालन किए बिना जरूरत के अनुसार फंड निवेश को संशोधित करने का प्रयास करेगा। दूसरे शब्दों में, पोर्टफोलियो मैनेजर या एक टीम पैसिव निवेश रणनीति का पालन किए बिना पोर्टफोलियो के अंदर मौजूद एसेट्स के आवंटन के सभी फैसले लेती है।

हालांकि, एक्टिवली मैनेज्ड ईटीएफ में एक बेंचमार्क इंडेक्स होता है। पोर्टफोलियो मैनेजर के पास आवंटन को बदलने के लिए बैंडविड्थ होता है। वे फिट दिखते हुए भी इंडेक्स से भटक सकते हैं।

पारंपरिक ईटीएफ के विपरीत, निवेशक पोर्टफोलियो की भविष्य की संरचना के बारे में जान नहीं सकेंगे, जो कि बाजार ज्यादा अस्थिर होने पर मददगार हो सकती है। पोर्टफोलियो मैनेजर कम मुनाफा देने वाले एसेट वर्ग से फंड को निकालकर अच्छा मुनाफा देने वाले एसेट वर्ग या सेक्टर में शिफ्ट कर सकता है।

भारत में, एक्टिवली मैनेज्ड ईटीएफ से जुड़े कुछ नियम हैं। पोर्टफोलियो मैनेजरों को MSCI जैसे इंडेक्स प्रदाताओं द्वारा प्रकाशित एक इंडेक्स का पालन करना चाहिए। यह शेयर बाजार में लिस्टेड विभिन्न कंपनियों के वित्तीय विवरणों पर रिसर्च करता है।

आखिर में, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड उन शुरुआती निवेशकों के लिए बहुत अच्छा विकल्प है, जो शेयर बाजार में कुछ निवेश करने की कोशिश कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि इस ईटीएफ निवेश गाइड ने आपको भारत में ईटीएफ निवेश के बारे में समझने में मदद की है। आप ईटीएफ पोर्टफोलियो मैनेजमेंट की पूरी गाइड देख सकते हैं।भारत के वित्तीय संस्थानों द्वारा क्यूरेट किए गए ईटीएफ आधारित वेल्थबास्केट्स देखें और बेहतर रिटर्न के लिए एक डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो बनाएं। हैप्पी इन्वेस्टिंग!

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

भारत में ईटीएफ में निवेश कैसे करें?

भारत में आप मार्केट आवर्स के दौरान ईटीएफ में निवेश कर सकते हैं। आपको बस अपने डीमैट  अकाउंट में लॉग-इन करना है और उस ईटीएफ को खोजना है जिसमें आप निवेश करना चाहते हैं। वहां आपको विभिन्न सेक्टरों और रणनीतियों के लिए ईटीएफ मिल जाएंगे।

क्या भारत में ETF एक अच्छा निवेश है?

ईटीएफ उन निवेशकों के लिए एक अच्छा साधन है जो अपने पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई करना चाहते हैं। प्रत्यक्ष इक्विटी निवेश(direct equity investments) की तुलना में, ईटीएफ  में ज्यादा विविधता मिलती है, जिससे जोखिम कम होता है। ईटीएफ म्यूचुअल फंड की तुलना में अधिक तरल (लिक्विड) होते हैं क्योंकि इन्हें एक्सचेंजों पर ट्रेड किया जा सकता है।

क्या मैं कभी भी ईटीएफ बेच सकता हूं?

एक निवेशक मार्केट आवर्स के दौरान ईटीएफ बेच सकता है। म्यूचुअल फंड की तुलना में ईटीएफ बेहतर लिक्विडिटी देते हैं। क्योंकि म्यूचुअल फंड को केवल मार्केट आवर्स के बाद सिर्फ फंड मैनेजर को ही बेचा जा सकता है।

क्या मैं लंबी अवधि के लिए ईटीएफ रख सकता हूं?

केवल ईटीएफ के साथ लंबी अवधि का एक अच्छा पोर्टफोलियो बनाना संभव है। आप इस ब्लॉग से 3 ईटीएफ रणनीतियों के बारे में जान सकते हैं।

क्या ईटीएफ पर डिविडेंड मिलता है?

भारत में डिविडेंड का भुगतान करने वाले ईटीएफ मौजूद हैं। ईटीएफ के आधार पर, डिविडेंड का भुगतान एक निश्चित अंतराल पर किया जा सकता है।

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